अजब फिजा है की मौसम बदल ने को है |
यांदे है ताज़ा पर रिश्ते बदल ने को है |
आइना कहता है चेहरा वही है, पर दिल बागी होने को है |
पहेचान मिली खुद की जिनसे हमें, आज फिर से अजनबी होने को है |
जांबाज़ तो हम भी इतने थे नहीं, शायद वक़्त बदल ने को है |
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